We blog coz' We are ! हम ब्लाग करते हैं, यह युग की नवीनतम ज़रूरत है !
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सोचा कुछ - हुआ कुछ और ही है
निट्ठल्लों सँग ही ऎसा होता क्यूँ है
सोचा कि कम्पू बेबी को हाथ न लगाऊँगा
अपने सड़े विचारों का अचार पक न जाये जब तक
शब्दों की खटास में तनिक मिठास न आये तब तक
बेटी को फोन लगाया, उछल पड़ी " पापा सच्चीऽऽ ?
बेटे को मेसेज़ किया, पलटवार हुआ " देखें कब तक ?
बिसूरता बुद्धू बक्सा खिल पड़ा, बोला आजा मेरे कोल आ
साड्डे नाल मनों अतिरँजन है, है मामला तेरे च्वायस का
तुझे वधू बालिका दिखाऊँ, या गहनों से अटी गरीबी से हरसाऊँ
नहीं समाचार दिखाओ यानि सम अचार, मैं जिससे रोटी तो खाऊँ
घणे फिट टाइम तू आया, बज़ट आण आला है, बोल वोई दिखाऊँ
बजट क्या रे ? वह तो आ भी गया..
आकर जाने कब का चला भी गया
गिली गिली बूम पटाक हुर्र हुश्श छूः
प्रोणोब काकू ने सूँ चिड़िया उड़ा दिया
money_world
अँय ? अखिल भारतीय फ़िनेन्स मेनेस्टर प्रोणोब दा ने दू मीनिट में शोबका चिरीआ उरा दीया
अब तो मरे  भूखन भाय, तेखनोई गोलमगोल कोरता था, गेहूँ सेरे एक रुपिया तीन झुठलाय दिया,
अस बुद्धू बक्सा दिहौ चिढ़ाय
मुझ सा बुद्धू ना जग में पाय
डाक्टर साहेब गयो खिसियाय
लौटे ब्लागर यों घर को आय
आपन टेक ना रख पाय
मूड़ निहोरे यह गुनगुनाय


हूँऽऽ हूँऽ बजट्ट अली बजट्ट अली
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
प्रोणो अईसे दिये उराय बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
उम्मीदें फुर्र कर गयी बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
ममता ना बरसा पाया तू बजट्ट अली
कैसे तू पल में झटक गयी
निर्धन खेतिहर से दूर फटक मटक मटक
भूली तू गाम कस्बे औ स्लम की गली

ऑय बजट्ट अली ऽऽ मैंऽऽऽऽय य य यीहः ऎ ऎ यीहः
 
बेशर्म न हो तू ज़हालत से बच 
यूँ मसल ना मेरीऽऽह तमन्ना
ज़मीं से जुड़ पर तू हमीं से टुर्र
पर्रर्र भुर्रर्र भुर्र भर्र भर भर भर
टाँय टाँय फिस्स तू आकड़ों की हेरा फेरी रे
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजवा दिया बाजाऽऽह सुन खरी खरी
पलट्ट ! ऒये पलट्ट जरा ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
बसेरा तू करती एक हाथ दूरी
दहा सफ़दरजँग के बाजू पीछे
दिखाती क्या ठेंगा तू क्या इस वज़ह से
बहुमत है तो क्यों डरियो रे 
कर मनमानी कर मनमानी मनमानी
पर बचियो ना कर यूँ तुम ये नादानी
देती जो थोड़ी रे थोड़ी मुस्कान रे
होता ये मन सनाना नाना सनन साना रे
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
उम्मीदें फुर्र कर गयी बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हेहे हे हे हे हेहे हो
रा रारा रा रारा रारा रो

अबे रो बे... जरा सुर में रो
ऊँ ऊँ ऊँऊँ ऊँ ऊँ ऊँआँ आँ
आँ आँ आँआँ आँ आँ आँआँऽऽऊँ
अच्छा उट्ठो, नाक पोंछों, थोड़ा पानी पियो मन हल्का हो जायेगा...
कितनी बार कहा कि सेन्टीमेन्टल हो न्यूज़ मत देखा करो,समाचार के सम-अचार का मसाला तुम्हें कभी से भी नहीं सूट किया करता है ! 6a00e0097e4e6888330112796f1e9c28a4-800wi
चलो नाक पोंछों, थोड़ा पानी पियो मन हल्का हो जायेगा ।
बड़े दिनों बाद पँडिताइन का दखल हुआ, पर इन्होंनें यह कैसे जाना कि गरीब देश की गरीब जनता के आँसू सूख चुके हैं ? इनका  सरोकार  तो  कभी  गैस  चीनी  दाल  और  वनस्पति तेल  से  ऊपर  उठा ही नहीं ? रहस्यकम तात.. सूक्ष्मातिक्षूम रहस्यकम ! और यह भी कि, जनता अब पानी पीकर गुज़ारा करने पर ही मज़बूर है ? पानी भी यदि सुलभ हो जाये तब, क्योंकि उसके नेताओं के आँखों का पानी तो मर चुका है, बचा खुचा पानी वह चुनावी भाषणों में बहा-टपका चुके हैं ! रा रारा रा रारा रारा रो.

21 June, 2009

Amar Kumar has sent you a cold drink


लपेटू समेटू: डा. अमर कुमार |


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पहिले निट्ठल्ला फोटुओं का इन्ट्राडेक्सन देगा : उसके बाद लिक्खेंगा.. लीखने का कुछ नेंईं जी, ईहाँ की तो पँच लाइन ही है.. “ सोचेला नहीं.. बस ठेलेला “ और  जब सर पे ख्याल ही न मंडराएं, और बिल्कुल रहा ना जाए , तो ? तो क्या, यदि आप भी कोल्ड ड्रिंक देखि के चले आये हैं, तो यह ब्ला ब्ला ब्लाग भी झेलिये..

 

आजकल अपुन के मेल बाक्स में कोल्ड-ड्रिंक की लूट मची है  ! मेरे ढाँचें का डाक्टरी वाला टेम्पलेट अँग्रेज़ी से भले बना हो, पर कंटेन्ट तो देसी रहेगा ! जैसे दूल्हे राजा का कितना भी ऋँगार कर देयो, उनका बाबू राजा बनाय के जयमाल के लिये ऊँची कुर्सी पर बईठाय देयो ! चारों तरफ़ फ़ोकस ही फ़ोकस.. जिज्जा जी, ही ही ही.. जीजाऽऽऽ जिही झी ही ही ही !  लेकिन जईसे ही जीजा का एकु मच्छर काटिस, बिलबिलाय गये.. अउर सीधै मच्छराइन बहन जी तक पहुँच गये, “ चटाक ! धात्त त्तेरी..  की .. .औंऽऽ ! “ औकात इसी को कहते होंगे, शायद ?

यही हाल अपना है.. कोल्ड ड्रिंक देखि के बुखार आता है.. भले लस्सी दे दो.. या शिकंज़ी की बात ही कुछ और है.. सत्तू का शरबत भी मँज़ूर.. बेल का शरबत मिलि जाय, समझो कि वाह वाह की जय जय !  ठँडी बियर शियर तो खैर..

             amar-nitthalla      amar-sent you

हमारे इतने चीकने पात भी न थे, जो इन होनहारों के हैं ! सो ऎसी कोई पिबंति धातु की वस्तु पी जाती है, या पीने स्कोप हुआ करता है । यह ज्ञान ही न था ! ऎसा उल्लेख किया जाता है, कि मैं बचपन से ही पिछड़े कैटेगरी में आता था ! पहले तो दूध से ही संतुष्ट हो लेता था, फिर यह यात्रा शिकँज़ी , शहतूत और भी भिन्न किसिम के शरबतों के बीच शँटिंग करती रही.. पर, कभी कभार मेहमान वगैरह के आने पर रूह अफ़्ज़ाई का चाँस भी मिल जाया करता था !

बाली उमरिया में ही प्रिमेडिकल वालों ने खदेड़ दिया और हम पहुँच गये कानपुर ! क्या तो सहर रहा.. कलक्टरगँज से बेनाझाबर.. हईयन हईयन हईयन रिक्शा वाला मेरे वेहरे के सामने अपना चूतड़ उचकाय रहा है, अउर अईसा शहर है कि खतम होने को नहीं ? बड़ी ऊब होती रही… मन करता था कहूँ, “ रिक्शा वाले भाय.. तुम ईहाँ बैठो.. अब हमहूँ तनि चालीस पचास पैडल मार लेयी, तुम्हरे रिक्शा मा ! “ बहुत सारी बातें मन में ही घुट कर रह जाती हैं, यह भी उनमें से एक रहा है ! आज खोलि रहे हैं,एक्लूसिवली आन निट्ठल्ला ! मन की घुटन इसी लोक में गूगल बाबा के चरणों में अर्पित कर दे.. ना ना कोई बात नहीं… अपने छद्म नाम से ही संकल्प ले ले, तू बस अभिव्यक्त हो ले और छुट्टी पा ले !

गूगल बाबा के डाक बक्सा में कोल्ड ड्रिंकन की बाढ़ आयी हुई है ! याः देक्खो.. फलाने सेन्ट यू अ..  ढिकाने सेन्ट यू अ कोल्ड ड्रिंक ! यहाँ तक तो ठीक रहा.. लेकिन आजु एक बिल्ली रास्ता काट गयी ! कऊनौ dipika123 जी ने भी कोल्ड ड्रिंक पठाय भेजा ! दिनेश जी.. अनिल पुदस्कर जी वगैरह को तो टरका दिया था, बेचारे मान गये ! यहाँ तक कि एक भड़ासी भाई भी मान गये.. कमरे में बैठ कर कीबोर्ड से आग उगलना और बात होगी.. लेकिन ज़नाब मान तो गये ही , यह क्या मेरा कम मान है ? पर दीपिका… शायद वह भी मान जाती..अगर मैं अपने फुल फार्म में डाँट देता.. वही तो ?

लेकिन हमारै मन बेईमान होय गया,थोड़ा बहुत हिलने डुलने के बाद महामहिम मन महाशय ने अपने पासवान जी यानि हमारे दिमगिया को पुचकारा , “ देख ले भाई.. तनि देखि भर ले.. तेरा क्या जाता है ? लड़की जात है, जो बात बात पर कोल्ड ड्रिंक पिया करती हैं.. फेल तो कोल्ड ड्रिंक.. पास हुई तो कोल्ड ड्रिक ! ग़र रूठ गयीं तब भी इनको मनाने को है ना.. कोल्ड ड्रिंक !! और.. और,  यह तो तुम्हरे कम्प्यूटर में समा के खुदै कोल्ड ड्रिंक लिये खड़ी है ! बस झाँक भर ले.. भले ही मत पीना.. कौन  दिनेश जी यहाँ  देख रहे हैं .. डर मत कौन तुमको अवमानना का नोटिस ही भेजे दे रहे हैं ? 

अरे.. देख भी ले भाई ! तो फिर देखा ?  ♬ ♩ ♪ ♫ ♬ .... ठहरिये जरा,  दो घूँट पानी पी कर फौरन आता हूँ ! गला तो भाई अपने घर के पानी से ही तर होता है । हर पानीदार का यही ठिकाना है.. गलत गलत गलत कट ( Censored ).. आप कुछ और पढ़िये

फिर..  अपुन को ऎंवेंईं .. सिनेमाई चलित्तर में पीने पिलाने वाली लाइन के गुरुदत्त जी याद आ गये..’या दिल की सुनो  .. दुनिया वालों..  या मुझको ही चुप रहने दों ऽऽ “ वाले गुरुदत्त ! मैं चुप नहीं हूँ, सब उगले दे रहा हूँ.. ज़ाहिर है कि, ऎसे परफ़्यूम दिल की ही सुनवायेंगे ! तो, सुनिये.. वर्ड काउँट 2509 हो गया है .. अब सुनाऊँगा तो रात बीत जायेगी !

कहना तो बहुत कुछ है, लेकिन इससे आगे जो भी लिखूँगा, वह पढ़ना शायद आपके लिये इतना निरापद न रहेगा । बाकी आप जानो कि एक अबला को इस मेलबाक्स से उस मेलबाक्स तक भटकाना कहाँ का अन्याय है ?

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