यूँ ही निट्ठल्ला, भला क्यों करता बकवास
गुनिये शायद निहित होगा यहाँ कुछ ख़ास
वरना तो समझिये बस निरर्थक टाइमपास
मानिये सहज गल्प, लँतरानी और परिहास

पोस्ट सदस्यता हेतु अपना ई-पता भेजें

7 July 2009

हाहा ही ही.. बजट्ट अली बजट्ट अली, हो बजट्ट अली

Technorati icon
सोचा कुछ - हुआ कुछ और ही है
निट्ठल्लों सँग ही ऎसा होता क्यूँ है
सोचा कि कम्पू बेबी को हाथ न लगाऊँगा
अपने सड़े विचारों का अचार पक न जाये जब तक
शब्दों की खटास में तनिक मिठास न आये तब तक
बेटी को फोन लगाया, उछल पड़ी " पापा सच्चीऽऽ ?
बेटे को मेसेज़ किया, पलटवार हुआ " देखें कब तक ?
बिसूरता बुद्धू बक्सा खिल पड़ा, बोला आजा मेरे कोल आ
साड्डे नाल मनों अतिरँजन है, है मामला तेरे च्वायस का
तुझे वधू बालिका दिखाऊँ, या गहनों से अटी गरीबी से हरसाऊँ
नहीं समाचार दिखाओ यानि सम अचार, मैं जिससे रोटी तो खाऊँ
घणे फिट टाइम तू आया, बज़ट आण आला है, बोल वोई दिखाऊँ
बजट क्या रे ? वह तो आ भी गया..
आकर जाने कब का चला भी गया
गिली गिली बूम पटाक हुर्र हुश्श छूः
प्रोणोब काकू ने सूँ चिड़िया उड़ा दिया
money_world
अँय ? अखिल भारतीय फ़िनेन्स मेनेस्टर प्रोणोब दा ने दू मीनिट में शोबका चिरीआ उरा दीया
अब तो मरे  भूखन भाय, तेखनोई गोलमगोल कोरता था, गेहूँ सेरे एक रुपिया तीन झुठलाय दिया,
अस बुद्धू बक्सा दिहौ चिढ़ाय
मुझ सा बुद्धू ना जग में पाय
डाक्टर साहेब गयो खिसियाय
लौटे ब्लागर यों घर को आय
आपन टेक ना रख पाय
मूड़ निहोरे यह गुनगुनाय


हूँऽऽ हूँऽ बजट्ट अली बजट्ट अली
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
प्रोणो अईसे दिये उराय बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
उम्मीदें फुर्र कर गयी बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
ममता ना बरसा पाया तू बजट्ट अली
कैसे तू पल में झटक गयी
निर्धन खेतिहर से दूर फटक मटक मटक
भूली तू गाम कस्बे औ स्लम की गली

ऑय बजट्ट अली ऽऽ मैंऽऽऽऽय य य यीहः ऎ ऎ यीहः
 
बेशर्म न हो तू ज़हालत से बच 
यूँ मसल ना मेरीऽऽह तमन्ना
ज़मीं से जुड़ पर तू हमीं से टुर्र
पर्रर्र भुर्रर्र भुर्र भर्र भर भर भर
टाँय टाँय फिस्स तू आकड़ों की हेरा फेरी रे
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजवा दिया बाजाऽऽह सुन खरी खरी
पलट्ट ! ऒये पलट्ट जरा ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
बसेरा तू करती एक हाथ दूरी
दहा सफ़दरजँग के बाजू पीछे
दिखाती क्या ठेंगा तू क्या इस वज़ह से
बहुमत है तो क्यों डरियो रे 
कर मनमानी कर मनमानी मनमानी
पर बचियो ना कर यूँ तुम ये नादानी
देती जो थोड़ी रे थोड़ी मुस्कान रे
होता ये मन सनाना नाना सनन साना रे
 
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
उम्मीदें फुर्र कर गयी बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
हेहे हे हे हे हेहे हो
रा रारा रा रारा रारा रो

अबे रो बे... जरा सुर में रो
ऊँ ऊँ ऊँऊँ ऊँ ऊँ ऊँआँ आँ
आँ आँ आँआँ आँ आँ आँआँऽऽऊँ
अच्छा उट्ठो, नाक पोंछों, थोड़ा पानी पियो मन हल्का हो जायेगा...
कितनी बार कहा कि सेन्टीमेन्टल हो न्यूज़ मत देखा करो,समाचार के सम-अचार का मसाला तुम्हें कभी से भी नहीं सूट किया करता है ! 6a00e0097e4e6888330112796f1e9c28a4-800wi
चलो नाक पोंछों, थोड़ा पानी पियो मन हल्का हो जायेगा ।
बड़े दिनों बाद पँडिताइन का दखल हुआ, पर इन्होंनें यह कैसे जाना कि गरीब देश की गरीब जनता के आँसू सूख चुके हैं ? इनका  सरोकार  तो  कभी  गैस  चीनी  दाल  और  वनस्पति तेल  से  ऊपर  उठा ही नहीं ? रहस्यकम तात.. सूक्ष्मातिक्षूम रहस्यकम ! और यह भी कि, जनता अब पानी पीकर गुज़ारा करने पर ही मज़बूर है ? पानी भी यदि सुलभ हो जाये तब, क्योंकि उसके नेताओं के आँखों का पानी तो मर चुका है, बचा खुचा पानी वह चुनावी भाषणों में बहा-टपका चुके हैं ! रा रारा रा रारा रारा रो.

17 टिप्पणी:

विवेक सिंह टिपियाइन कि

उलझाओगे ?

उलझालो !

हम उलझ उलझकर भी , टिप्पणी छोड़ जाएंगे !

Udan Tashtari टिपियाइन कि

हूँऽऽ हूँऽ बजट्ट अली बजट्ट अली

कितनी बार कहा कि सेन्टीमेन्टल हो न्यूज़ मत देखा करो-काहे नहीं समझते भई..नाक पौंछे की नहीं जी?? त टिप्पणी अप्रूव करो!!

मस्त रचा है.

Arvind Mishra टिपियाइन कि

हा जी हाजी अली और बज्जाट अली जे बजरंग बली

Vivek Rastogi टिपियाइन कि

बजट्ट अली बजट्ट अली
अति सुन्दर रचना, और देखो बुद्धू बक्सा।

बी एस पाबला टिपियाइन कि

ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली
ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली

हेहे हे हे हे हेहे हो
रा रारा रा रारा रारा रो
अबे रो बे... जरा सुर में रो

ऊँ ऊँ ऊँऊँ ऊँ ऊँ ऊँआँ आँ
आँ आँ आँआँ आँ आँ आँआँऽऽऊँ


मस्त है

काजल कुमार Kajal Kumar टिपियाइन कि

अब तो बजट भी निठल्लों का बजट लगने लगा है.

अविनाश वाचस्पति टिपियाइन कि

अल्‍ली के साथ गल्‍ली
गल्‍ली के साथ टल्‍ली
भी डालते तो उलझन
सुलझन जाती।

Anil Pusadkar टिपियाइन कि

ये बजट अली तो बहुतई डेंजर है।इससे न तो ब्रूस ली निपट सकते हैं,न जेट ली और ना ही मुहम्मद अली।अब तो बस बजरंगबली ही बचा सकता है इस बजट अली से।छा गये डाक्साब्।पानी भी कहा मिल रहा है।पानी पी-पी कर गालिया बक रहे है पानी के लिये लोग्।चाहो तो पूछ लिजिये सुरेश चिपलूणकर जी से।

विनीत कुमार टिपियाइन कि

बजट्टअली को देख मची खल्ली बल्ली
खल्ली बल्ली खलबली,खल्लीबल्ली
लोन लेनेवालों चलो अब पतली गल्ली
खलीबली खलीबली खलीबली खल्ली बल्ली...

अभिषेक ओझा टिपियाइन कि

इसे गाकर भी ठेल देते :)

HEY PRABHU YEH TERA PATH टिपियाइन कि

बजट्ट अली बजट्ट अली
बडा ही कठीन प्रशन पत्र!
सर! अब आपको प्रणाम, सच्ची-सुन्दर बातो के लिए।
मगलकामनाओ सहीत
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर

राज भाटिय़ा टिपियाइन कि

अले बाबा नाक क्या, हम तो गंगा मै शुद्ध होम कर तिपन्नी देने आये है आले आले यह लो हमाली सुंदर सी उलझनो भ्ली तिपन्नी
लाम लाम जी

hem pandey टिपियाइन कि

मानसून ने पानी का बजट बिगाड़ दिया है.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी टिपियाइन कि

इक बेचारा डाक्टर बजट चिन्ता की भॆंट चढ़ा। रुक-रुककर घरघराता है। पाठकों को उलझाता है। कवित्त शैली में छायावादी रचनाएं सुनाता है। लेकिन हाय रे अफ़सोस, अपुन को कूऊऊऊश नहीं समझ में आता है।

महामंत्री - तस्लीम टिपियाइन कि

बहुत खूब, बहुत खूब।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

RAJ SINH टिपियाइन कि

गुरुदेव ,
बड़ी उम्दा पोस्ट ठेले हुए हो . आपके चरण पकड़ने को मन हुलसाय रहा है. जल्दीयाई होगा . आठ हज़ार मील से हजार की दूरी पे आई गए हैं . जल्दीयाई जीरो इन कर देंगे .

RAJ SINH टिपियाइन कि

गुरुदेव ,
बड़ी उम्दा पोस्ट ठेले हुए हो . आपके चरण पकड़ने को मन हुलसाय रहा है. जल्दीयाई होगा . आठ हज़ार मील से हजार की दूरी पे आई गए हैं . जल्दीयाई जीरो इन कर देंगे .

लगे हाथ टिप्पणी भी मिल जाती, तो...

आपकी टिप्पणी ?

कुछ कहना चाहेंगे ..? तो कह भी डालिये !!
यदि शालीनता के पाज़ामे को छोड़ेंगे, तो तक़लीफ़ होगी..
आप लिखेंगे, तो हम भी लिखते रहेंगे या इसी में सँगत दे दीजिये कि, उष्ट्राणाम् विवाहेषु गीतम् गायंति गर्दभाः
परस्परम् प्रशंसति, अहो रूपम्, अहो ध्वनिः।
जरा अपुन भी तो खुश हो लें भाई !

कोई कमेन्ट मर्डरेशन लागू नहीं किया गया है,
क्योंकि आप स्वयँ ही स्वनियमन में सक्षम और दक्ष हैं !

यह अपना हिन्दी ब्लागजगत, जहाँ थोड़ा बहुत आपसी विवाद चलता ही है, बुद्धिजीवियों का वैचारिक मतभेद !

शुक्र है कि, सैद्धान्तिक सहमति अविष्कृत हो जाते हैं, और यह ज़्यादा नहीं टिकता, छोड़िये यह सब, आगे बढ़ते रहिये !

सम्पूर्ण पोस्ट सूची / ब्लाग साइट मैप