पहिले निट्ठल्ला फोटुओं का इन्ट्राडेक्सन देगा : उसके बाद लिक्खेंगा.. लीखने का कुछ नेंईं जी, ईहाँ की तो पँच लाइन ही है.. “ सोचेला नहीं.. बस ठेलेला “ और जब सर पे ख्याल ही न मंडराएं, और बिल्कुल रहा ना जाए , तो ? तो क्या, यदि आप भी कोल्ड ड्रिंक देखि के चले आये हैं, तो यह ब्ला ब्ला ब्लाग भी झेलिये..
आजकल अपुन के मेल बाक्स में कोल्ड-ड्रिंक की लूट मची है ! मेरे ढाँचें का डाक्टरी वाला टेम्पलेट अँग्रेज़ी से भले बना हो, पर कंटेन्ट तो देसी रहेगा ! जैसे दूल्हे राजा का कितना भी ऋँगार कर देयो, उनका बाबू राजा बनाय के जयमाल के लिये ऊँची कुर्सी पर बईठाय देयो ! चारों तरफ़ फ़ोकस ही फ़ोकस.. जिज्जा जी, ही ही ही.. जीजाऽऽऽ जिही झी ही ही ही ! लेकिन जईसे ही जीजा का एकु मच्छर काटिस, बिलबिलाय गये.. अउर सीधै मच्छराइन बहन जी तक पहुँच गये, “ चटाक ! धात्त त्तेरी.. की .. .औंऽऽ ! “ औकात इसी को कहते होंगे, शायद ?
यही हाल अपना है.. कोल्ड ड्रिंक देखि के बुखार आता है.. भले लस्सी दे दो.. या शिकंज़ी की बात ही कुछ और है.. सत्तू का शरबत भी मँज़ूर.. बेल का शरबत मिलि जाय, समझो कि वाह वाह की जय जय ! ठँडी बियर शियर तो खैर..
हमारे इतने चीकने पात भी न थे, जो इन होनहारों के हैं ! सो ऎसी कोई पिबंति धातु की वस्तु पी जाती है, या पीने स्कोप हुआ करता है । यह ज्ञान ही न था ! ऎसा उल्लेख किया जाता है, कि मैं बचपन से ही पिछड़े कैटेगरी में आता था ! पहले तो दूध से ही संतुष्ट हो लेता था, फिर यह यात्रा शिकँज़ी , शहतूत और भी भिन्न किसिम के शरबतों के बीच शँटिंग करती रही.. पर, कभी कभार मेहमान वगैरह के आने पर रूह अफ़्ज़ाई का चाँस भी मिल जाया करता था !
बाली उमरिया में ही प्रिमेडिकल वालों ने खदेड़ दिया और हम पहुँच गये कानपुर ! क्या तो सहर रहा.. कलक्टरगँज से बेनाझाबर.. हईयन हईयन हईयन रिक्शा वाला मेरे वेहरे के सामने अपना चूतड़ उचकाय रहा है, अउर अईसा शहर है कि खतम होने को नहीं ? बड़ी ऊब होती रही… मन करता था कहूँ, “ रिक्शा वाले भाय.. तुम ईहाँ बैठो.. अब हमहूँ तनि चालीस पचास पैडल मार लेयी, तुम्हरे रिक्शा मा ! “ बहुत सारी बातें मन में ही घुट कर रह जाती हैं, यह भी उनमें से एक रहा है ! आज खोलि रहे हैं,एक्लूसिवली आन निट्ठल्ला ! मन की घुटन इसी लोक में गूगल बाबा के चरणों में अर्पित कर दे.. ना ना कोई बात नहीं… अपने छद्म नाम से ही संकल्प ले ले, तू बस अभिव्यक्त हो ले और छुट्टी पा ले !
गूगल बाबा के डाक बक्सा में कोल्ड ड्रिंकन की बाढ़ आयी हुई है ! याः देक्खो.. फलाने सेन्ट यू अ.. ढिकाने सेन्ट यू अ कोल्ड ड्रिंक ! यहाँ तक तो ठीक रहा.. लेकिन आजु एक बिल्ली रास्ता काट गयी ! कऊनौ dipika123 जी ने भी कोल्ड ड्रिंक पठाय भेजा ! दिनेश जी.. अनिल पुदस्कर जी वगैरह को तो टरका दिया था, बेचारे मान गये ! यहाँ तक कि एक भड़ासी भाई भी मान गये.. कमरे में बैठ कर कीबोर्ड से आग उगलना और बात होगी.. लेकिन ज़नाब मान तो गये ही , यह क्या मेरा कम मान है ? पर दीपिका… शायद वह भी मान जाती..अगर मैं अपने फुल फार्म में डाँट देता.. वही तो ?
लेकिन हमारै मन बेईमान होय गया,थोड़ा बहुत हिलने डुलने के बाद महामहिम मन महाशय ने अपने पासवान जी यानि हमारे दिमगिया को पुचकारा , “ देख ले भाई.. तनि देखि भर ले.. तेरा क्या जाता है ? लड़की जात है, जो बात बात पर कोल्ड ड्रिंक पिया करती हैं.. फेल तो कोल्ड ड्रिंक.. पास हुई तो कोल्ड ड्रिक ! ग़र रूठ गयीं तब भी इनको मनाने को है ना.. कोल्ड ड्रिंक !! और.. और, यह तो तुम्हरे कम्प्यूटर में समा के खुदै कोल्ड ड्रिंक लिये खड़ी है ! बस झाँक भर ले.. भले ही मत पीना.. कौन दिनेश जी यहाँ देख रहे हैं .. डर मत कौन तुमको अवमानना का नोटिस ही भेजे दे रहे हैं ?
अरे.. देख भी ले भाई ! तो फिर देखा ? ♬ ♩ ♪ ♫ ♬ .... ठहरिये जरा, दो घूँट पानी पी कर फौरन आता हूँ ! गला तो भाई अपने घर के पानी से ही तर होता है । हर पानीदार का यही ठिकाना है.. गलत गलत गलत कट ( Censored ).. आप कुछ और पढ़िये
फिर.. अपुन को ऎंवेंईं .. सिनेमाई चलित्तर में पीने पिलाने वाली लाइन के गुरुदत्त जी याद आ गये..’या दिल की सुनो .. दुनिया वालों.. या मुझको ही चुप रहने दों ऽऽ “ वाले गुरुदत्त ! मैं चुप नहीं हूँ, सब उगले दे रहा हूँ.. ज़ाहिर है कि, ऎसे परफ़्यूम दिल की ही सुनवायेंगे ! तो, सुनिये.. वर्ड काउँट 2509 हो गया है .. अब सुनाऊँगा तो रात बीत जायेगी !
कहना तो बहुत कुछ है, लेकिन इससे आगे जो भी लिखूँगा, वह पढ़ना शायद आपके लिये इतना निरापद न रहेगा । बाकी आप जानो कि एक अबला को इस मेलबाक्स से उस मेलबाक्स तक भटकाना कहाँ का अन्याय है ?












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